महाविद्यालय के माध्यम से सामाजिक सेवाकार्य
यदि आप एक सफल व्यक्ति है और अपनी कमाई का एक हिस्सा ट्रस्ट के माध्यम से जनसेवा के कार्यों में खर्च करते हैं तो आपको एक महाविद्यालय शुरू करना चाहिये| पुरे विश्व में उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं| इस काम में सरकार, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएँ भी आगे आकर सहयोग करती है| यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र में विद्यालय या महाविद्यालय शुरू करते हैं जहां शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है तो इससे आपके धन का तो सदुपयोग होता ही है, साथ ही आपके मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है, संस्था की साख मजबूत होती है और स्थान विशेष का विकास तो होता ही है|
एक भ्रान्ति है कि विद्यालय / महाविद्यालय या किसी भी तरह का शिक्षण संस्थान शुरू करना और उसे सही तरह से चलाना बहुत मुश्किल है| यदि आपके मन में शिक्षा के माध्यम से अपने क्षेत्र और वहां के निवासियों की सेवा की प्रबल इच्छा और दृढ़ संकल्प है तो यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं|
आज के समय में कुछ शैक्षिक सहायता संस्थाएं (एजुकेशन कंसल्टेंसी फर्म) हैं जो इस कार्य को शुरू करने के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शन देती है और विद्यालय/महाविद्यालय खुलने और उसमें स्टाफ व वर्किंग टीम की नियुक्ति तक का सारा कार्य करवा देती है| आगे का कार्य स्टाफ और वर्किंग टीम संभाल लेती है और कहीं कोई परेशानी आती भी है तो कंसल्टेंसी सर्विस का मार्गदर्शन मिल जाता है|
दूसरी भ्रान्ति ये है विद्यालय/महविद्यालय शुरू करने में बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है| यह अर्धसत्य है किसी भी विद्यालय/महाविद्यालय को शुरू करने के लिए एक समिति की जरूरत होती है यदि एक अच्छी समिति है तो वह इस व्यय को आपस में बाँट सकती है जिससे एक व्यक्ति पर अर्थभार नहीं पड़ता| यदि हम बात करें महाविद्यालय के लिए भवन या जमीन की तो इसकी शुरुआत कुछ समय के लिए अनुबंधित किराये की जगह से भी कर सकते हैं जिसे बाद में महाविद्यालय के नाम से रजिस्टर्ड जगह पर स्थानांतरित किया जा सकता है|
महाविद्यालय शुरू करने को लेकर और भी कई मिथक हैं, जिसके चलते इसक कार्य को शुरू लोग कतराते हैं| इस लेख में महाविद्यालय कैसे शुरू करें इसके बारें में संक्षेप में बताया गया है, जिससे आपको भी नया महाविद्यालय खोलने में मदद मिलेगी|
वैसे तो महाविद्यालय खोलने लिए मूलभूत नियमावली एक ही जैसी होती है परन्तु अलग-अलग राज्यों में कुछ नियमों में परिवर्तन हो जाता है, या यों कहें कि स्थानीय प्रशासनिक नियमों के चलते कुछ-कुछ विषयों में भिन्नता आ जाती है| इस आलेख के नियम राजस्थान के विश्वविद्यालयों की नियमावली के अनुसार हैं, हो सकता है किसी दूसरे राज्य में नियमों में कुछ बदलाव हो पर मुख्य स्वरूप लगभग ये ही होगा| अधिक जानकारी के लिए आप स्थानीय कंसल्टेंसी फर्म से संपर्क कर सकते हैं| जैसे मध्यप्रदेश के में विद्यालय/महाविद्यालय शुरू करने लिए AARCONS एक जांची-परखी एजुकेशन कंसल्टेंसी कंपनी है|
समिति का गठन और पंजीयन: यह एक नियम है कि महाविद्यालय की शुरूआत करने के लिए आपको एक समिति का गठन करना पड़ेगा और अधिनियम 1958, 1959, 1992 व 2013 का अनुसार उसका पंजीकरण करवाना आवश्यक होगा| समिति के पंजीयन सम्बन्धी सभी जानकारी राजस्थान में ईमित्र और मध्यप्रदेश में एमपी ऑनलाइन जैसे ई-गवर्नेंस नागरिक सेवा पोर्टल धारको के पास से मिल जाएंगी|
सदस्य संख्या और योग्यता: जैसे विद्यालय खोलने के लिए किसी शिक्षण समिति में 7 सदस्यों का होना आवश्यक है उससे अलग कॉलेज खोलने के लिए बनाई गई समिति में कम से कम 21 सदस्यों की समिति होना आवश्यक है| जिसमे सदस्यों की कुल संख्या का 30 प्रतिशत हिस्सा महिला सदस्यों के लिए आरक्षित है| समिति में कम से कम 2 सदस्य शिक्षाविद होने चाहिए| और सबसे मुख्य बात सभी सदस्य एक जाति, समुदाय या परिवार के नहीं होने चाहिए|
भूमि और भवन: यदि आपके पास या शिक्षण समिति के पास अभी कोई भूमि या भवन नहीं हैं तो भी अनुबंधित किराए के भवन से भी शुरुआत कर सकते हैं, पर शर्त ये है कि तीन साल के अंदर आपको महाविद्यालय के नाम से जमीन खरीदकर स्थानांनतरण करवाना आवश्यक होगा |
भूमि के माप के सन्दर्भ में राज्यों के अलग अलग नियम है, जैसे राजस्थान राज्य की राजधानी में महाविद्यालय की मान्यता लेने के लिए आपको कम से कम 2000 वर्ग मीटर की जगह, संभाग मुख्यालय में महाविद्यालय खोलने के लिए कम से कम 4000 वर्ग मीटर जगह, जिला मुख्यालय में 5000 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 8000 वर्ग मीटर की जमीन है तो आप महाविद्यालय शुरू कर सकते है|
स्टाफ: नियमानुसार 50 छात्रों पर कम से कम एक टीचर या लेक्चरार की नियुक्ति होनी ही चाहिए| उसके अलावा मैनेजमेंट टीम, कार्यालयकर्मी और सफाई कर्मचारी की भी नियुक्ति होनी चाहिए| आज कल महाविद्यालय स्टाफ के योग्य उम्मीदवार उलपब्ध करवाने के लिए प्लेसमेंट कंपनियां काम कर रही है |
बैंक खाता और वेबसाइट: मान्यता लेने के लिए महाविद्यालय के नाम से क्षेत्र के किसी भी बैंक में खाता होना चाहिए, जिसमें कम से कम एक लाख की राशि जमा होनी चाहिए और जमा राशि की प्राप्ति के साक्ष्य भी होने चाहिए| एक बात विशेष रूप से ध्यान रखी जानी चाहिए कि खाता महाविद्यालय के नाम से होना चाहिए ना की संचालन समिति के नाम से|
इस खाते में महाविद्यालय के नाम से 10 लाख की एफडी बनवा कर रखनी पड़ती है| यदि कन्या महाविद्यालय खोला जा रहा है अथवा किसी पिछड़े या आरक्षित क्षेत्र में यह महाविद्यालय खोला जा रहा है तो 5 लाख की एफडी करवानी होगी|
साथ ही कालेज की एक वेबसाइट होना भी आवश्यक है, जिसमें कालेज की जानकारियां, संचालन समिति के बारे में जानकारी तथा संचालित किये जाने वाले सभी कोर्सों की जानकारी व उनकी फीस का विवरण होना चाहिए|
दस्तावेज: कॉलेज की मान्यता लेने के लिए कुछ एक अतिआवश्यक दस्तावेजों की जरुरत होती है, जिनका विवरण निम्नानुसार है|
- समिति की बैठक विवरण रजिस्टर (मिनट बुक) की फोटो कॉपी, जिसमें महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया हो |
- समिति के पंजीयन प्रमाण पत्र और संविधान की फोटोकॉपी |
- समिति सदस्यों की सूची, जिसमें उनका नाम, संपर्क नंबर, उनका व्यवसाय आदि का विवरण और आधार, पेनकार्ड आदि की फोटो प्रति|
- बैंक खाते का विवरण और
- शपथ पत्र और निर्धारित शुल्क के साथ भूमि का पट्टा, जमाबंदी, नक्शा, रूपांतरण आदेश आदि की कॉपी|
- यदि भूमि / भवन किराये का है तो स्थानीय प्रशासनिक प्रतिनिधि अथवा तहसीलदार का प्रमाणपत्र|
- किराये के भवन की दशा में तीन वर्ष में स्वयं का भवन तैयार करवाने का शपथपत्र
- सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) द्वारा प्रमाणित ब्लू प्रिंट व भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र|

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