मध्यप्रदेश में शिक्षा का भविष्य : Future of Education in M.P.
हमारा देश जैसे-जैसे साधनसंपन्न होता जा रहा है वैसे-वैसे यहां शिक्षा के नवाचारों का भी विकास हो रहा है, जिसका परिणाम यह है कि यहां आजादी से पूर्व स्थापित शिक्षा नीतियों (Education Policies) को त्यागकर नवीन शैक्षणिक नीतियों के माध्यम से प्रत्येक राज्य में अध्ययनरत शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास (All round Development of Learners) पर कार्य किया जा रहा है |
साक्षरता के ग्राफ पर मध्यप्रदेश की स्थिति :
वर्तमान समय में मध्यप्रदेश में एक लाख से अधिक प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शासकीय व निजी विद्यालय है, 500 से अधिक डिग्री कालेज है और 25 यूनिवर्सिटी है, जिसमें से कुछेक यूनिवर्सिटी तो अपनी शिक्षा नीतियों और प्रबंधन के लिए देश भर में प्रसिद्ध है | शिक्षा के क्षेत्र में देखा जाए तो मध्यप्रदेश राज्य वर्तमान में भारत सरकार द्वारा जारी मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) में 15वें स्थान पर है| 2001 की राष्ट्रीय जनगणना में मध्यप्रदेश में साक्षरता की दर 63.70% थी जो 2011 की जनगणना तक बढ़कर 69.30% हो गई थी जिसका अर्थ यह है कि इन दस वर्षों में साक्षरता दर में 05.60% तक की वृद्धि हुई है |
05.60 % की वृद्धि दर भले ही देखने-सुनने ज्यादा न लगाती हो परन्तु मध्यप्रदेश जैसे राज्य में जहां आज भी कई गाँव मूलभूत सुविधाओं से कटे हुए हैं, ऐसे में 5.60 प्रतिशत की वृद्धि भी आने वाले परिवर्तन का संकेत है | यह भी उल्लेखनीय है कि ऐसी परिस्थितियों में भी 2011 की जनगणना अनुसार मध्यप्रदेश में ग्रामीण साक्षरता दर (Rural Literacy Rate) 63.94% दर्ज की गई है |
शासन-प्रशासन ने मध्यप्रदेश में शिक्षा की परिस्थिति सुधारने के लिए कई योजनाएं तैयार कर रखी है परन्तु वर्तमान में देश-प्रदेश में फैली कोविड-19 महामारी के चलते शिक्षा का स्तर सुधारने की तुलना में लोगों के प्राणों की रक्षा को अधिक महत्त्व दिया जा रहा है| स्थिति नियंत्रण में आते ही इन योजनाओं के क्रियान्वयन (Implementation) की संभावनाएं है|
शिक्षा और रोजगार की वर्तमान स्थिति का राज्य पर असर :
वर्तमान की स्थिति में देखा जाए तो मध्यप्रदेश में अभी सामान्य शिक्षा पर आधरित विद्यालय व महाविद्यालय ही हैं| राज्य के बच्चों को बेहतर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा (Technical and Professional Education) के लिए दुसरे राज्यों में जाना पड़ता है और शिक्षा पूर्ण हो जाने के बाद भी योग्यता अनुसार अवसर न मिल पाने के कारण हमारे राज्य की प्रतिभाएं (Talents) दूसरे राज्यों कार्य करते हैं|
सभी प्रकार की शिक्षा और रोजगार (Employment) की कमी के चलते राज्य को आर्थिक हानि होती है बल्कि शिक्षार्थियों के दूसरे राज्यों में जाने से प्रदेश में शिक्षा और रोजगार में वृद्धि का मार्ग भी बाधित होता है|
आने वाले समय में मध्यप्रदेश में शिक्षा की स्थिति :
आने वाला समय शिक्षा की दृष्टी से पुरे भारत में बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है| विगत दो वर्षों में कोरोना महामारी (COVID-19) के चलते हुई शिक्षा की हानि की पूर्ति के लिए भारत सरकार के शिक्षा विभाग का केंद्रीय सलाहकार बोर्ड (Central Advisory Board) यह निर्णय ले चुका है कि देशभर में तकनीकी कौशल (Technical Skills) और व्यावसायिक आधार वाली शिक्षा पर अधिक बल दिया जाएगा| आपको अवगत करवा दें कि केंद्रीय सलाहकार बोर्ड में भारत के शिक्षामंत्री साहित दोनों सदनों से चयनित कुछ सांसद, प्रशासनिक व्यक्तित्व और प्रतिनिधी के रूप में हर राज्य के शिक्षामंत्री होते हैं, जो मिलकर शिक्षा के लिए नीति-निर्धारण (Policy Formulation) करते हैं|
ऐसी प्रबल संभावनाएं हैं कि महामारी की स्थिति से निकलते ही प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक (Employable), व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने वाले पाठ्यक्रमों (Courses) पर अधिक बल दिया जाएगा, जिसकी परिणीति (Outcome) में प्रदेश भर में नए विद्यालय-महाविद्यालय शुरू किये जाएंगे और पहले से स्थापित शैक्षणिक संस्थानों के विकास पर जोर दिया जाएगा |
अवसर के आगमन की दस्तक :
बुद्धिजीवियों और दूरदर्शियों (Intellectuals and Visionaries) की माने तो प्रदेश सहित पुरे देश में जल्द ही शैक्षिक नवाचारों (Educational Innovations) की लहर आने वाली है | आने वाले समय में लोगों का रुझान शिक्षा में निवेश (Investment) की ओर बढ़ेगा | शासन-प्रशासन की ओर से भी नए शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने और संस्थान के संचालन में सभी प्रकार का सहयोग किये जाने की संभावनाएँ व्यक्त की जा रही है | रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई शैक्षिक परामर्श संस्थान (Educational Consutlancy Firms), निजी संस्थाएं (Private Entities) व प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे |
आने वाला समय में शिक्षा का आधारभूत ढांचा (Basic Infrastructure) बदलने वाला है, बरसों पहले लागू की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन होने के कारण सभी विद्यालय, महाविद्यालय, कोचिंग सेंटर आदि को भी अपनी संरचना (structure) और कार्यशैली (Modus Operandi) में परिवर्तन लाना होगा| शिक्षा में संसाधनों (Resources) और तकनीकी विकास (Technological Development) को अपनाना ही होगा |
प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रदेश में ही अच्छे शिक्षा और रोजगार के अवसर मिले और उन्हें अध्ययन और जीविकोपार्जन (Earning) के लिए दूसरे राज्यों में जाना नहीं पड़े इस हेतु शैक्षिक परामर्श संस्थान अभी अपने स्तर पर भी कार्य कर रहे हैं |
यदि आप भी शैक्षणिक संस्थान (Educational institution) संचालित कर रहे हैं और आने वाले समय के अनुसार अपने संस्थान का संवर्धन (Growth) करना चाहते हैं या आने वाले अवसर की दस्तक को पहचानते हुए नवीन शिक्षण संस्थान शुरू करना चाह रहे हैं तो आज ही हमसे सम्पर्क करें |
(AARAMBH CONSULTANCY SERVICES)
Neemuch - Madhya Pradesh
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Nice blog
जवाब देंहटाएंthanks
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